Sunday, December 16, 2012

परमेश्वर की महिमा हो उससे ही सब आशीषें हैं

परिचयआपका स्वास्थय कितना जरूरी हैक्या आप हर सुबह जब उठते हैं अपने आप को तरोताजा देखना चाहते हैं?  यदि पैसा कोई पैमाना हैमैंने पढ़ा है कि केवल अमेरिका में दो खरब डालर (खरबअरब नहीं)  से ज्यादा  हमारे स्वास्थय पर खर्च किया जाता  हैक्या परमेश्वर हमारे स्वास्थय का ध्यान रखता हैक्या धार्मिकता एवं स्वास्थय में कोई सम्बन्ध हैक्या हमारा परमेश्वर के साथ  कोई करार है  कि स्वास्थय रहने के लिए हम भरसक प्रयास करेंगेचलो हम बाइबिल अध्यन में लगजाते हैं और देखते हैं कि बाइबिल स्वास्थय के बारे में क्या बताती है
1. प्रशंसा  के कारण 
A. पढ़े भजन संहिता 103:1. "भीतर सेपरमेश्वर की प्रशंसा  करो इसका क्या मतलब होता है? ( यह दिखावटी प्रशंसा  नहीं है.  यह परमेश्वर की प्रशंसा  बिलकुल भीतरी भाग से हैबिलकुल गहराई से.)
B. पढ़े भजन संहिता 103:2. मैंने अक्सर लोगों को यह कहते सुना है कि हमे परमेश्वर की प्रशंसा करने चाहिए "क्योंकि वो कौन है." भजन लेखक परमेश्वर की प्रशंसा करने के लिए कौन से अतरिक्त  कारण देता है? (वो हमे लाभ पहुंचाता हैयह तो प्रशंसा करने  का बिलकुल स्वार्थी कारण लगता हैलेकिन यह स्वाभाविक है(और आसानउसकी प्रशंसा करना जो हमारी सहायता करता है.)  
C. पढ़े भजन संहिता 103:3-5. स्तुति लेखक यहाँ क्या वर्णन कर रहा है? (पहले से चर्चित फायदे जो परमेश्वर हमे देता है!)
1. चलो इन फायदों की लिस्ट बनाते हैं. (पाप से माफ़ीरोगों का उपचारहमे गड्ढे  से बाहर निकालनाप्रेम एवं अनुकम्पा देनाहमारी इच्छायों  की पूर्ति अच्छी चीज़ों सेहमे योवन देना.) 
a. जैसे तुम इस लिस्ट को देखते होक्या  इन फायदों में से किसी का भी स्वास्थय से कुछ लेना देना है? (हाँहमे जवानी की अनुभूति कराना एवं बिमारिओं से छुटकारा दिलाना है.) 
b. क्या तुम इस बात को कोई महत्त्व देते हो कि जब लेखक हमारे फायदों की लिस्ट बना रहा था उसने सबसे पहले पापों की माफ़ी रखी उसके बाद रोगों से मुक्ती? (अनंत जीवन इस धरती के जीवन से ज्यादा ठीक है.) 
(1) चलो इन दो फायदों को देखते हैं
हमारे पापों की माफ़ी तथा हमारे रोगों से छुटकाराविस्तारपूर्वक.
II. पापों से माफ़ी के लिए प्रशंसा करो.
A. पढ़े 2 तिमुथियस 1:9. परमेश्वर ने हमे हमारे पापों से छुटकारा दिलाने का प्लान कब बनाया था? ( समय शुरू होने से पहलेहमारे अस्तित्व में आने से पहले.)
1. परमेश्वर ने जब हमारी रचना करी यह उसके बारे में क्या संकेत देता है? (उसने हमारी रचना इस ज्ञान के साथ करी थी कि हो सकता है कि  हम उसको अस्वीकार कर देंगे.) 
a. कल्पना करो कि तुम माँ अथवा पिता हो और तुम्हरे बच्चे ने तुम्हे अस्वीकार कर दिया हैयदि तुम समय पीछे कर सकते थे और इस बच्चे को पैदा नहीं होने देतेक्या तुम ऐसा करते? (जो माता पिता यह कहते, "कि मै इस बच्चे कि अभिलाषा रखता हूँ"   असाधारण  प्रेम दिखाना हैहमारे परमेश्वर हमारे लिए वोही असाधारण प्रेम दिखाया है.) 
B. पढ़े इफिसियों 2:8-10.  क्या हम इस योग्य हैं कि हमारे पापों की माफ़ी हो तथा हमे  अनंत जीवन  मिले?  (नहींयह तो परमेश्वर की तरफ से उपहार हैना कि हमारे कार्यों का परिणामहालाँकिहमारी रचना अच्छे कार्य करने के लिए हुई है.)
C. अब हम समझ सकते हैं कि क्यों गीतकार भजन 103:3 में परमेश्वर की प्रशंसा हमारे पापों की माफ़ी के लिए करता है
III. परमेश्वर की प्रशंसा करे कि उसने हमे बिमारियों से छुटकारा दिलाया तथा किशोरावस्था दी 
पढ़े निर्गमन 15:26.  परमेश्वर की आज्ञा  मानना तथा बीमारी के बीच क्या सम्बन्ध है
1. क्या इसका मतलब यह हुआ क्योंकि हमने पाप किया है इसलिए बीमार हुए? (शायद)
2. याकूब की पुस्तक हमको इस विषय के बारे में क्या सिखाती है? (याकूब के "दोस्तउससे से कह रहें हैं कि तुम परमेश्वर की बात नहीं मानते हो इसलिए बीमार हो तथा पीड़ा में होलेकिनहमे याकूब की पुस्तक के पहले पाठ    से  पता है कि परमेश्वर ने शैतान से कहा था कि याकूब "दोषरहित एवं धार्मिकवो मनुष्य जो परमेश्वर का भय खाता है तथा बुराई से दूर रहता है." याकूब 1:8.)
a. याकूब एवं निर्गमन 15:26 से  बीमारी की जड़ के बारे में क्या निष्कर्ष निकाले?(कभी कभी हम बीमार हो जाते है कि हमने परमेश्वर का अनुकरण  नहीं किया और कभी हम बीमार हो जाते हैं कि हमने परमेश्वर का अनुकरण कियाइसके अलावाहमारा सामान्य ज्ञान हमे बताता है कि कभी  कभी  हम बीमार हो जाते है क्योंकि हम पापी दुनिया में रहते है.)
3. निर्गमन 15:26. के  कुछ  अंतिम शब्द देखे." मै तुम्हारा चंगा करने वाला परमेश्वर हूँ." क्या परमेश्वर का हमारे स्वास्थय में प्रतिकूल तथा अनुकूल कोई सम्बन्ध है? ( ऐसा जान पड़ता है कि परमेश्वर कह रहा है कि मै रोगों को ठीक करने वाला हूँयह परमेश्वर के सामान्य गुण हैस्वास्थय की तरफ एक सकारात्मक रुखहालाँकिपरमेश्वर अवज्ञाकारी के ऊपर बीमारी भी लाता हैपरमेश्वर हमारे स्वास्थय में स्वाकारात्मक  एवं नकारात्मक दोनों रूप में शामिल है.)    
B. पढ़े यिर्मयाहा 7:22-23. क्या परमेश्वर लोगों को उसकी आराधना करने की आज्ञा दे सकता था? (बिलकुलइसी तरह लोग मूर्ति देखा करते थे)        
1. परमेश्वर ने हमारे लिए और क्या किया? (परमेश्वर केवल हमारी प्राथर्ना  नहीं मांग रहा हैपरमेश्वर हमारे साथ सम्बन्ध बनाना देख रहा हैपरमेश्वर चाहता है कि हमारा जीवन सुख पूर्वक जाएऔर इसी कारण से उसने इतनी सारे आदेश दिए हैंयह आज्ञापालन का सकारात्मक पक्ष  है, "उपचारात्मकपक्ष.)
2. हम बाइबिल में इसके क्या उधारण देखते है? (यदि तुम लैव्यवस्था के पाठ 11-15 को  सरसरी नजर से देखे तो यह पायेगे कि परमेश्वर ने मूसा को बहुत सारे नियम दिए थे जिससे लोग स्वस्थ्य एवं रोग मुक्त रह सके.)
C. पढ़े नीति वचन 3:7-8. अहंकार से दूर रहोपरमेश्वर से डरोबुराई से कन्नी काटोक्या प्रतक्ष्य रूप से  इनका स्वाथ्य एवं मजबूत हड्डियों से कोई सम्बन्ध है?(यह आत्मिक एवं प्राकर्तिक स्वास्थय में सम्बन्ध दिखाता हैऐसा लगता है कि यह परमेश्वर का विचार है कि हमारे ऊपर निर्णय अथवा परख के कारण बीमारी आईऔर उपचार आशीष की तरह आयेधार्मिकता एवं स्वास्थय के बीच में कोई सहज सम्बन्ध हैआज्ञाकारिता का स्वाभाविक परिणाम मजबूत एवं स्वस्थ्य शरीर है.)    
  IV. त्याग की प्रशंसा करे 
A. पढ़े रोमिओ 12:1. मैंने सोचा यीशु परमेश्वर का मेमना था जो हमारे पापों को ले जाने की खातिर मराहम क्यों त्याग करते हैं
1. चलो हम इस समस्या का हल खोज़ेहमारे त्याग करने का क्या कारण है? ( "परमेश्वर के विचार से दया." यह उस दया की तरफ इशारा है जो यीशु ने हमको हमारे पापों के लिए मर कर दिखाईउसके अनुनयाई होने के कारण हमे वो ही त्याग वाली प्रवर्ती दिखानी होगी.)  
2. हमारा बलिदान यीशु के बलिदान से किस प्रकार भिन्न है? (हम लोग एक  "जीवितबलिदान हैमै इसको "मृत्युबलिदान के ऊपर चुनुगा!)
3. यह कैसे आराधना है? ( हमारी आराधना का एक हिस्सा उस परमेश्वर के लिए है जिसने अपना जीवन हमारे लिए बलिदान कियाउसके लिए हम कुछ बलिदान करते है.)
4. अब यहाँ एक गूढ़ प्रश्न आता हैहम किस प्रकार के बलिदान की बात कर रहें हैतुम्हे इससे क्या समझ में आता है कि तुम अपना "शरीरएक "जीवित बलिदानकी तरह भेंट कर दो?"
B. पढ़े रोमिओ 12:2. यह पूर्व प्रश्न का क्या संभावित जवाब देता है?(हमारा "बलिदानपरमेश्वर की वसीयत के अनुरूप है नाकि दुनिया की इच्छानुसार.)
1. रोमिओ 12:1. हमारे शरीर को उल्लिखित करता है और यह हमारे दिमाग को हवाला देता हैक्या यह दोनों जीवित बलिदान में शामिल है? (निसंदेह:, इसमें प्राकृतिक अंश हैस्वस्थ्य शरीर परमेश्वर के लिए "बलिदानका एक सकारात्मक रूप दिखाता हैहमारे कार्य करने के ढंग हमारे दिमाग की प्रवर्ती के अनुसार होते हैहमे दिमाग एवं शरीरका पूर्ण रूप से बलिदान देने की आवश्यकता है!) 
2. क्या स्वस्थ्य इसका एक भाग है? (इसका समानान्तर नया दिमाग तथा नया शरीर लगता हैयह हमारी परमेश्वर  की पूर्ण आराधना  को प्रदर्शित करती है.) 
3. सभी प्रकार के लोग अपने शरीर की पूजा करते हैंयह हमारे जीवन का एक उद्देश्य हैक्या हमने यहाँ पर इसकी  चर्चा करी है? (लेख हमे दुनिया के अनुरूप चलने के बारे में चेतावनी देता है.इसके स्थान परहमारी दिमाग एवं शरीर से की गयी आराधना हमारे परमेश्वर की महानता दिखाती है.) 
C. दोस्तोंअगर तुमने स्वास्थ्य एवं धार्मिकता के बीच के सम्बन्ध के बारे नहीं सोचा हैअगर तुमने अपने शरीर के बारे में अपनी परमेश्वर की आराधना का एक हिस्सा समझ कर नहीं सोचा हैक्या तुम आज इसबारे में गौर करोगेआज क्यों नहीं वचनबद्ध हो जाओ और परमेश्वर से कहो की वो तुम्हारीदिमाग ही नहींपरन्तुतुम्हरे शरीर  को भी एक "जीवित बलिदानबनाने में सहायता करे?

Thursday, December 13, 2012

क्रिसमस के दृष्टिकोण को ना खोने दें


पढ़ें मत्ती 1:18-23
अब मसीह का जन्म इस प्रकार हुआ कि जब उसकी माता मरियम की मंगनी युसूफ के साथ हुयी,  तो उनके समागम से पूर्व ही वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पायी गयी| उसके पति युसूफ ने धर्मी होने के कारण उसे बदनाम ना करने की इच्छा से चुपचाप उसे त्याग देने का विचार किया| पर जब वह यह सब सोच रहा था तो प्रभु का एक स्वर्गदूत उसे स्वप्न में यह कहता दिखाई पड़ा, "हे युसूफ, दाउद के पुत्र, तू मरियम को अपनी पत्नी बनाने से मत डर, क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है | वह पुत्र को जन्म देगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा | अब यह सब इसलिए हुआ कि प्रभु ने जो वचन नबी के द्वारा कहा था पूरा हो: "देखो एक कुँवारी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी और उसका नाम इम्मानुअल रखा जायेगा" जिसका अर्थ है, परमेश्वर हमारे साथ |
बोलो - परमेश्वर हमारे साथ है
आज कोई भी देश अगर मजबूत कहा जाता है तो वह मजबूत है उसके सैन्य बल पर
सीमा पर होना और शत्रु का सामना करना एक बात पर सीमा पार करके शत्रु के खेमें में घुस जाना अलग बात है
बोलो - सेनाओं का यहोवा हमारे संग संग है याकूब का परमेश्वर हमारा ऊँचा गढ़ है
चलो एक वचन पढ़तें है
1 युहन्ना 3:8ब
...........परमेश्वर का पुत्र इस अभिप्राय से प्रकट हुआ कि शैतान के कार्य का नाश करें
क्रिसमस की इंटरेस्टिंग स्टोरी एक मकसद से रची गयी और उसका रचनाकार हमारा श्रीष्टिकर्ता है
उस श्रीष्टिकर्ता के प्रेम के फलस्वरूप ही यीशु जन्मा और शत्रु के खेमे में जा घुसा, ताकि वह परमेश्वर के लोगों को अनंत आत्मिक मृत्यु से छुड़ा सके
यहाँ तक कि उसने मरने को भी स्वीकार कर लिया उसने बिना किसी स्वार्थ के अपमान और दुःख झेला और कष्टमयी क्रूस की मृत्यु से  भी मुह ना मोड़ा बल्कि हमारे पापों का मोल चुका दिया
रोमियों 5:6 कहता है जब हम निर्बल ही थे तब ठीक समय पर मसीह भक्तिहीनो के लिए मरा 
इस व्यस्त क्रिसमस के पर्व पर कही ऐसा ना हो कि हाँ क्रिसमस के सही दृष्टिकोण को ना खो बैठे 
याद रखे कि वह इसलिए जन्मा ताकि हम नरक की अग्नि से छुडाये जाएँ 
पढ़ें युहन्ना 3:16
 क्योंकि परमेश्वर, जगत से इतना प्रेम करता है कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, नाश न हो परंतु अनंत जीवन पाए.
तुम उसी परमेश्वर के द्वारा उस कार्य के लिए बुलाये गए हो जो यीशु ने किया
क्या तुम क्रिसमस पर शत्रु के खेमे में घुस कर जो खोये हुए है उनके उद्धार के लिए प्रार्थना करोगे?
पढ़ें लुका 15:7
मैं तुमसे कहता हूं कि इसी प्रकार स्वर्ग में भी ......, मन फिरने वाले एक पापी के लिए बढ़कर आनंद मनाया जायेगा
होने दो कि तुम्हारे बीच में अभी इसी वक्त स्वर्ग आ जाये और महान आनंद मने क्योंकि मसीह यीशु हमारे बीच में जन्म चुका है 
अमीन

Saturday, November 17, 2012

आपकी सुरक्षा की दीवार कैसी है?

चीन की महान दीवार दुनिया के सात अजूबों में से एक है |
अस्त्रोनौट्स के अनुसार चन्द्रमा से यदि किसी चीज़ की झलक दिखती है वह है चीन की महान दीवार, इस महान दीवार को चीनियो  ने शत्रु के हमले से बचने के लिए इतना मजबूत बनाया था कि उसे कोई भी तोड़ ना सका उस पर चढ़ ना सका ना जीत सका, लेकिन फिर भी चीनियो ने तीन बार शत्रुओं से हार खाई
लेकिन यह संभव कैसे हुआ? जबकि दीवार तीस फीट ऊंची अट्ठारह फीट मोटी और एक हज़ार पांच सौ मील लम्बी थी|
उन चीनियो की हार इसलिए हुई क्यों कि उनके चौकीदारों ने घूस लेकर शत्रुओं को हमला करने के लिए अन्दर जाने दिया|
क्या हम अपने घर की सुरक्षा के लिए दीवार  बनाते हैं?
उत्तर होगा 'हाँ' हम सभी मजबूत दरवाजे और चार दिवारी  बनाते हैं
जैसा स्वाभाविक में है वैसा ही आत्मिक जगत में भी है,
क्या हम आत्मिक जगत में भी अपने घर के चारों ओर सुरक्षा की दीवार बनाते हैं?
आप कहेंगे, हाँ मै हर रोज़ बनाता हूँ
बहुत अच्छा
क्या दरवाजा या फाटक ठीक से बंद करते हैं, ताकि कोई चुपचाप ना घूस सके
बस यही वह जगह है जहाँ हम मात खा जाते हैं
चार दिवारी तो बनते हैं लेकिन फाटक को खुला छोड़ देते हैं
परमेश्वर का लहू हमारे लिए एक मजबूत बाड़ा है
लेकिन हमारी आदतें और स्वभाव एवं पाप कर्म प्रभु यीशु के लहू के मजबूत बाड़े को कमज़ोर कर देता है
क्या मेरी बात समझ रहे हैं आप लोग?
अयूब 1:1-5,
ऊज़ देश में अय्यूब नाम एक पुरुष था; वह खरा और सीधा था और परमेश्वर का भय मानता और बुराई से परे रहता था। उसके सात बेटे और तीन बेटियां उत्पन्न हुई। फिर उसके सात हजार भेड़-बकरियां, तीन हजार ऊंट, पांच सौ जोड़ी बैल, और पांच सौ गदहियां, और बहुत ही दास-दासियां थीं; वरन उसके इतनी सम्पत्ति थी, कि पूरबियों में वह सब से बड़ा था। उसके बेटे उपने अपने दिन पर एक दूसरे के घर में खाने-पीने को जाया करते थे; और अपनी तीनों बहिनों को अपने संग खाने-पीने के लिये बुलवा भेजते थे। और जब जब जेवनार के दिन पूरे हो जाते, तब तब अय्यूब उन्हें बुलवा कर पवित्र करता, और बड़ी भोर उठ कर उनकी गिनती के अनुसार होमबलि चढ़ाता था; क्योंकि अय्यूब सोचता था, कि कदाचित मेरे लड़कों ने पाप कर के परमेश्वर को छोड़ दिया हो। इसी रीति अय्यूब सदैव किया करता था।
 अयूब लगातार अपने परिवार और बच्चों के लिए त्याग बलि देता था ताकि उनके पाप माफ़ हो सकें
अयूब 1:10
क्या तू ने उसकी, और उसके घर की, और जो कुछ उसका है उसके चारों ओर बाड़ा नहीं बान्धा? तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है,
इससे पता चलता है अयूब की लगातार प्रार्थना परमेश्वर के सम्मुख पहुँचती थी और परमेश्वर स्वुम सुरक्षा का घेरा बनाता था और उसे आशीष देता था
इसलिए अपने दिल को टटोलो और परमेश्वर से माफ़ी मांगो और होने दो कोई भी पाप कर्म  तुम्हारे दिल के फाटक के ज़रिये तुम्हारे जीवन की चार दिवारी की सुरक्षा को नष्ट ना करे
परमेश्वर ने हमे मध्यस्ता करने वाले लोग दिए हैं
वास्तव में हम सभी परमेश्वर के आगे मध्यस्ता करते हैं
हम सिर्फ अपनी प्रार्थना के लिए नहीं बुलाये गए हैं बल्कि हम बुलाये गए है की दूसरों के लिए प्रार्थना करें इस तरह हम सभी मध्यस्ता के लिए बुलाये गए हैं|
बोलो हमारी दीवार चीन की महान  दीवार से भी ताकत वर है और इसके फाटक शत्रु को घुसने ना देंगे अयूब चौकीदारी का काम कर रहा था वह अपने बच्चों के लिए सदेव सचेत था, लेकिन उसने भय की दुष्ट आत्मा को अपने फाटक के जरिये अन्दर आने दिया जो उसके जीवन में हार का कारण बन गयी|
क्या तुम हारोगे?
बोलो - प्रभु यीशु ने हमे जयवंत बनाया है!
अमीन
प्रार्थना
स्मरण योग्य  बातें -
* आराधना स्तुति अवश्य करे
* प्रभु यीशु के लहू में छूटकारा है
प्रभु यीशु के लहू के गीत गाये जिनसे शैतान डरता है
प्रार्थना - पिता यीशु के नाम पर मैं आपसे माफ़ी मांगता हूँ एक बार फिर मुझे अपने लहू से धो डालो, मैं परमेश्वर की संतान हूँ और यशायाह 54:17 के अनुसार मेरे विरोध में उठा हुआ कोई भी शास्त्र सफल ना होगा
अन्धकार की दुनिया के तीरों को जो मेरे विरोध में भेजे गये हैं उन्हें मैं यीशु के नाम पर वापस भेजता हूँ|
* भजन संहिता के 140:7 के अनुसार परमेश्वर मेरी ताकत है और उसने मेरे सिर को ढका हुआ है |
* प्रभु यीशु के नाम पर मैं प्रधानो अधिकारों, अन्धकार की ताकतों को और दुष्टता की उन आत्मिक सेनाओं को जो आकाश मैं है, मुझ पर या मेरे परिवार पर  हमला करने की कोशिश करती है उन्हें मैं बांधता हूँ और उन शक्तियों को मुझे हानि पहुँचाने से रोक देता हूँ|
* पिता प्रभु  यीशु के नाम पर मैं तंत्र-मन्त्र, श्रापों, जादू-टोना और अंधकार की ताकतों को प्रभु यीशु के लहू के द्वारा इन सभी को नष्ट करता हूँ|
* प्रभु यीशु के लहू द्वारा मैं उन दुष्ट आत्माओं उनकी सहायकों और उनकी ढालों को ध्वस्त करता हूँ और उन दुष्टों को सामर्थ रहित कर देता हूँ
* प्रभु यीशु के लहू द्वारा मैं ऐसे लोगों की तमाम शक्तियों को मुहर बंद कर देता हूँ ताकि वे उन्हें किसी पर भी प्रयोग में ना ला सकें , और होने पाए कि वे प्रभु यीशु को जाने और उसे अपना कर दुष्टता के कामों को छोड़ दें

* प्रभु यीशु के लहू द्वारा मैं शत्रु के कैंप में खलल कर देता  हूँ और जो भी उसकी योजना मेरे या मेरे परिवार के लिए है उसे पूरी तरह से ध्वस्त करता हूँ
* प्रभु यीशु के लहू द्वारा मैं उन दुष्ट ताकतों को जो किसी भी तरह हमारे शरीर के अंगों या तंत्र को प्रभावित करके बीमार करने की कोशिश करतें है ध्वस्त करता  हूँ
* प्रभु यीशु के लहू द्वारा मैं मत्ती 18:18  के अनुसार यीशु के नाम पर बोले हुए श्रापों , विभिन्न अनुष्ठानो, काली विद्ध्या, तंत्र-मन्त्र, जादू-टोना और योग विद्ध्या की ताकतों को बाँध कर तोड़ता हूँ
* प्रभु यीशु के नाम पर यशायाह 11:2 के अनुसार मैं यहोवा का  आत्मा, बुद्धि का आत्मा, समझ का आत्मा, युक्ति और पराक्रम का आत्मा, ज्ञान और यहोवा के भय का आत्मा साथ ही उसकी दया, कृपा, और महिमा का आत्मा स्वयं पर और अपने परिवार  पर छोड़ता हूँ
* मैं धन्यवाद करता हूँ कि यशायाह 54:17, इफिसियों 1:22, और 1 युहन्ना 4:4 के अनुसार शत्रु के द्वारा बनाया गया कोई भी शास्त्र सफल ना होगा क्योंकि मैं प्रभु यीशु के लहू से ढका हूँ, और पिता तुमने सभी कुछ उसके पैरो तले कर दिया है, चूँकि मसीह मुझमें निवास करता है हम यह ऊँचे स्वर में बोलते है कि महान वह है जो हमारे भीतर है ना कि वह जो दुनिया में है
कुछ महत्वपूर्ण स्मरण करने योग्य बातें
* 1 युहन्ना 1:7 के अनुसार प्रभु यीशु का लहू हमारे सभी पापों को धो देता है और हमें क्षमा कर देता है ( पाप की ओर से मन फेर लो )
* व्यवस्थाविवरण 28:6 के अनुसार जब मैं कहीं जाऊं आशीषित हूँ और जब मैं घर वापस लौटूं आशीषित हूँ , इसलिए मैं प्रभु यीशु के नाम पर जहाँ जा रहा हूँ उस स्थान को प्रभु यीशु के लहू से ढकता हूँ और दुष्ट की सभी योजनाओं को रद्द करता हूँ| मैं दुष्ट आत्माओं को बांधता  हूँ और स्वर्गदूतों को मेरी सुरक्षा के लिय छोड़ता हूँ | साथ ही जब मैं वापस लौटूं दुष्ट की कोई भी योजना मेरा पीछा ना करे
* व्यवस्थाविवरण 9:3 और लुका 10:19 के अनुसार मैं जानता हूँ कि परमेश्वर ने मेरे विरोधी को हरा दिया है और मुझे सामर्थ दी है कि मैं साँपों और बिच्छुओं को कुचल सकूं | इसलिए मैं उन्हें और उनके हमलों को कुचलता हूँ और इस तंत्र-मन्त्र को सात गुना वापस भेजता हूँ और इसे यीशु के लहू द्वारा उन पर बाँध देता हूँ, साथ ही किसी भी तरह की कोई डोर अगर मुझ तक या मेरे परिवार से जुड़ रही हो उसे काट कर जला देता हूँ प्रभु यीशु के नाम पर
2 तीमुथियुस 4:7 के अनुसार मैंने विश्वास का एक अच्छा युद्ध लड़ा
बोले-
पिता मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि आपकी पवित्र आत्मा ने मेरे भीतर अन्धकार की ताकतों और उनके कामों को जला दिया है
पिता मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि आपने मुझे पवित्र आत्मा से भर दिया है
पिता मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि आपने मुझे शान्ति और आनंद दिया है
मैं आपकी प्रशंशा और स्तुति करता हूँ
स्मरण करने योग्य बातेंक्या घर के मुखिया होने के नाते आप अपने बच्चों व पत्नी के लिए प्रार्थना करते हैं कि नहीं?
लेकिन आज के बाद अवश्य ही करें
निर्गमन 12:3 और 13 के अनुसार परमेश्वर का मेमना हमारे परिवार के लिए त्याग बलि चढ़ चुका है इसलिए मैं किसी भी विनाश के तीरों को छूने की अनुमति नहीं है
मेरी प्रार्थना तुम सबके लिए
पिता मैं आपसे यीशु के नाम पर प्रार्थना करती हूँ कि आप इन सभी को मन की आँखें दे ताकि ये आत्मिक जगत में देख सकें और स्थिति को परख सकें| साथ ही मैं इन सबको आपके लहू से ढकती हूँ और इनके विरोध में उठा हर शास्त्र असफल करती हूँ | इनके या इनके परिवार के लिए की गई  दुष्ट की हर चाल को मैं रद्द करती हूँ और आपके छुटकारे की आत्मा को छोड़ती हूँ
आमीन 

Friday, November 2, 2012

अपने दिल की चौकसी करो

गलातियों 5:22-23
पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं।
अगर पहले दो फल प्रेम और आनंद तुममे नहीं है तो तीसरा फल मौजूद हों ये मुश्किल होगा|
इससे पहले मैं आगे बढूँ मेरे कुछप्रश्न है
क्या तुम्हारा जीवन शांति मय है?
क्या तुम्हारे परिवार में शांति है?
क्या तुम अपने माता-पिता की तरफ से शांत हो?
क्या तुम अपने बच्चों की तरफ से शांत हो?
क्या तुम अपने काम से संतुष्ट हो?
क्या अपने बॉस की ओर से शांति है?
तुम्हारे लिए शांति का क्या मूल्य है?
तुम इसके लिए क्या मूल्य दोगे?
तुम क्या सोचते हो कि तुम क्या करो ताकि शांति तुम्हारे जीवन में आ जाये?
परमेश्वर ने क्या किया ताकि शांति तुम्हारे जीवन में आ जाये?
बोलो- अपना पुत्र दिया
पुत्र ने क्या किया ताकि शांति हमारे जीवन में आ जाये?
बोलो- अपना बलिदान दिया
फिर क्या किया?
पढ़ें युहन्ना 14: 27
मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूं, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
यीशु  ने अपनी शांति दी, और उसे हमारे पास छोड़ दी, और कहा कि अपने दिलो को तकलीफ में ना आने दो
इसका मतलब साफ़ ज़ाहिर है कि परमेश्वर हमारे जीवन के लिए सजग है| जब उसने हमे पवित्र आत्मा दिया उसने हमे उसके फल भी दिए| परमेश्वर का प्रेम बिना शर्त का है इसका मतलब है कि वह हमसे सदैव प्रेम रखता है|
आनंद परमेश्वर से ही है उसके बाहर नहीं|
शांति वहीँ मिलेगी जहाँ प्रेम व आनंद होगा|
परमेश्वर परिवार के मध्य में है और उसकी आत्मा के फल लोगों के बीच में ही विकसित होतें हैं |
क्या त्तुम परमेश्वर के फलों को अपने मध्य में पनपते हुए देखना पसंद करोगे या नहीं!
अगर हाँ तो अवश्य जानो इसके लिए तुम्हें मोल चुकाना पड़ेगा
क्या तुम मोल चुकाना नहीं चाहते हो, तो फिर तुम यीशु के कैसे कहलाओगे
पढ़ें युहन्ना 17: 16-18
जैसे मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं। सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है।  जैसे तू ने जगत में मुझे भेजा, वैसे ही मैं ने भी उन्हें जगत में भेजा।
इसका मतलब तुम दुनिया में हो पर दुनिया के नहीं | तुम्हारे ज़रिये यीशु दूसरों के जीवन में काम करता है, इसका मतलब वह तुम्हारे बहुत करीब है, फिर तुम भी अवश्य ही धीरे-धीरे उसके जैसे होते जाओगे
क्या तुम उसके जैसे हो या शत्रु जैसे ?
अपने को परखो!
कैसे परखे
जांचों
1 . क्या परमेश्वर की शांति तुम्हारे साथ है?
पढ़ें रोमियो 5:1-2
सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।
अगर परमेश्वर की शांति तुममे नहीं है तुम दुनिया से प्रभावित होगे और तुम्हारा विश्वास डगमगाएगा, फिर तुम परमेश्वर से कैसे पाओगे | यह बहुत ही खतरनाक है क्योंकि इससे शैतान की मर्जी होती है परमेश्वर की नहीं|
पढ़ें याकूब 1:6-8
पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्देह न करे; क्योंकि सन्देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है। ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा। वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है॥
2 . क्या अपने जीवन में तुम्हे शांति है?
पढ़ें रोमियो 5:3-5
केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।
जीवन में जब कठिन वक्त आता है तो तुम्हारे कदम कहाँ चल पड़ते हैं ?
परमेश्वर हमारा पिता है वह हमे अवश्य ही काटेगा-छटेगा ताकि हमारा व्यक्तित्व निखर सके और हम उसके समान बन सकें
अपने वचनों में परमेश्वर ने हमे अपनी शांति का भरोसा दे रखा है ना कि भय का
3 . क्या शांति और अभिमान में तकरार है?
पढ़ें मत्ती 11:28-30
हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है॥
यीशु जिस बोझे की बात कर रहें है वह बोझा हमारे दिन प्रतिदिन होने वाली प्रतिक्रियाओं से सम्बंधित है | जैसे कि परिवार सम्बंधित, जॉब सम्बंधित, स्वास्थ सम्बंधित| यही बोझे हमे दिन-प्रतिदिन ढोने पड़ते है| फिर क्या तुम दुनिया के दिखावे वाले अभिमान में पड़े हो?
कितनी बार तुम शेखी और दिखावे के चक्कर में अपने आप को मुश्किल में डाल चुके हो
परमेश्वर में होने के बाद भी अगर तुम दुनिया की चाल चलोगे तो क्या शैतान तुम्हें परमेश्वर के राज्य का भागी दार होने में रुकावट ना डालेगा
4 . क्या जिद्दी या हठी लोगों के बीच में भी शांति कायम रहती है?
पढ़ें रोमियो 14:12-19
सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना अपना लेखा देगा॥ सो आगे को हम एक दूसरे पर दोष न लगाएं पर तुम यही ठान लो कि कोई अपने भाई के सामने ठेस या ठोकर खाने का कारण न रखे। मैं जानता हूं, और प्रभु यीशु से मुझे निश्चय हुआ है, कि कोई वस्तु अपने आप से अशुद्ध नहीं, परन्तु जो उस को अशुद्ध समझता है, उसके लिये अशुद्ध है।  यदि तेरा भाई तेरे भोजन के कारण उदास होता है, तो फिर तू प्रेम की रीति से नहीं चलता: जिस के लिये मसीह मरा उस को तू अपने भोजन के द्वारा नाश न कर।  अब तुम्हारी भलाई की निन्दा न होने पाए।  क्योंकि परमेश्वर का राज्य खाना पीना नहीं; परन्तु धर्म और मिलाप और वह आनन्द है;  जो पवित्र आत्मा से होता है और जो कोई इस रीति से मसीह की सेवा करता है, वह परमेश्वर को भाता है और मनुष्यों में ग्रहण योग्य ठहरता है।  इसलिये हम उन बातों का प्रयत्न करें जिनसे मेल मिलाप और एक दूसरे का सुधार हो।
हमे परमेश्वर ने मेल-मिलाप के लिए बुलाया है ना कि छींटा-कशी के लिए | बल्कि परमेश्वर के प्रेम को बनाये रखे रहने के लिए जिसमे आनंद और शांति है |
पढ़ें मत्ती 18:19
फिर मैं तुम से कहता हूं, यदि तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी बात के लिये जिसे वे मांगें, एक मन के हों, तो वह मेरे पिता की ओर से स्वर्ग में है उन के लिये हो जाएगी।
परमेश्वर नहीं चाहता कि हममे से कोई भी नष्ट हो तभी वह एक साथ सहमत होने की बात कर रहा है | अगर हम सहमत नहीं शैतान अपना काम कर जाता है और परिवार नष्ट हो जाते है
अगर तुम्हारा प्रेम दुनिया से है तो खतरा है
कुछ पॉइंट्स याद रखने के लिए-
1 . यीशु ने बोला उसका मार्ग सकरा है, लेकिन दुनिया का रास्ता लुभावना है
2 . लगता है कि हम जीवन जी रहें है लेकिन वह मार्ग अन्धकार की ओर ले जाता है
3 . अनादर लाता है और शैतान हावी होने लगता है
4 . शांति को भंग करता है
एक सलाह -
पढ़ें नीतिवचन 4:23
सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है।
अपने दिल को संभाल कर रखो, क्योंकि युद्ध की भूमि यह दुनिया और उसके चाल-चलन हैं
पढ़ें रोमियों 12:2
और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो॥
मेरा अंतिम प्रश्न -
किसने तुम्हारा दिल पकड़ा हुआ है दुनिया ने या यीशु ने?
अगर यीशु ने, तो तुम हार के लिए नहीं बनाये गए हो
पढ़ें नीतिवचन 24:16
क्योंकि धर्मी चाहे सात बार गिरे तो भी उठ खड़ा होता है; परन्तु दुष्ट लोग विपत्ति में गिर कर पड़े ही रहते हैं।
बोलो- मैं परमेश्वर का धर्मी हूँ, इसलिए उसकी शान्ति मेरे साथ है
मेरी प्रार्थना -
पिता प्रभु यीशु के नाम पर मैं तुम्हें धन्यवाद देती हूँ और मांगती हूँ कि तुम हमारे जीवनों में सफलता भर दो | मेरी प्रार्थना है कि लोग तुम पर भरोसा करें और तुम अपनी शान्ति उन्हें दे दो| उनके जीवन के अतिउत्तम दिन आने पायें और तुम उन्हें अपूर्व आशीषों से भर दो | परमेश्वर का मार्ग शांति देता है यह बात पवित्र आत्मा उनके जीवन में  प्रकट कर दो |

अमीन